DRDO ने तैयार किया एंटी-कोविड ड्रग, इस तरह कोरोना से लड़ने में मदद करेगी 2DG दवाई

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DRDO 2DG Anti Covid Drug
DRDO ने तैयार किया एंटी-कोविड ड्रग, इस तरह कोरोना से लड़ने में मदद करेगी 2DG दवाई

कोरोना से लड़ने के लिए भारत के पास एक और हथियार आ चुका है। जी हां, कोविड-19 से लड़ने के लिए DRDO के वैज्ञानिकों द्वार एक Anti Covid 19 Drud तैयार की गई है। इस दवाई का नाम है 2-deoxy-D-glucose यानी 2डीजी है। डीआरडीओ के वैज्ञानिकों द्वारा यह एंटी-कोविड ड्रग तैयार किया गया है। इस दवाई का पहला बैच रक्षामंत्री राजनाथ और स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन सिंह द्वारा लॉन्च किया गया है।

आपको बता दें कि पिछले एक साल से हाइड्रॉक्‍सीक्‍लोरोक्विन, रेमडिसिविर, आइवरमेक्टिन जैसी अन्य दवाइयों का कोरोना पर असर को लेकर रिसर्च किया जा रहा है, लेकिन 2DG को कोरोना की पहली Anti Covid Drug कहा जा रहा है। चलिए जानते हैं इसके बारे में विस्तार से-

किसने किया 2DG दवाई को तैयार?

डिफेंस रिसर्च ऐंड डिवेलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (DRDO) के इंस्टिट्यूट ऑफ न्‍यूक्लियर मेडिसिन एंड अलाइड साइंसेज (INMAS) द्वार कोरोना की इस दवा को विकसित किया है। दवाई को तैयार करने में हैदराबाद स्थित डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरी (DRL) के रिसर्चर्स का भी काफी बड़ा योगदान रहा है। डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरी (DRL) द्वारी ही यह दवाई आम लोगों के लिए तैयार की जाएगी। बता दें कि यह दवा पाउडर के रूप में उपलब्‍ध होगी।

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कब की गई थी दवाई बनाने की शुरुआत?

कोविड-19 की पहली लहर में ही इस दवाई को बनाना शुरू किया गया था। पहली लहर के दौरान ही INMAS के वैज्ञानिकों ने इस दवाई को तैयार करने का काम शुरू कर दिया था। ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) ने मई 2020 में 2DG दवा के कोविड मरीजों पर फेज 2 ट्रायल की मंजूरी दे दी। फेज-2 ट्रायल अक्टूबर 2020 तक चला। इस ट्रायल में बताया दवाई को सेफ बताया गया और इससे कोरोना से रिकवरी होने में भी मदद मिल सकती है। फेज-2 के रिजल्ट के बाद DCGI ने नवंबर 2020 में फेज 3 ट्रायल की मंजूरी दी। इसके बाद ट्रायल डेटा के आधार पर DCGI ने 9 मई 2021 को इस दवा की आपातकालीन इस्‍तेमाल को मंजूरी दे दी है।

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शरीर में कैसे काम करेगी ये दवा

फिलहाल इस दवा का इस्तेमाल सेकंडरी मेडिसिन की तरह किया जाएगा। यानी यह प्राइमरी मेडिसिंस के सपोर्ट में इसका इस्तेमाल किया जाएगा। देखने में यह दवा ग्लूकोज की तरह है, लेकिन यह ग्लूकोज की तरह कार्य नहीं करता है। दरअसल, कोविड-19 जब हमारे शरीर में प्रवेश करता है, तो नई कॉपीज बनाना शुरू कर देता है। नई कॉपीज को बनाने के लिए इन्हें ताकत की आवश्यकता होती है, जो इन्हें ग्लूकोज से मिलता है। ऐसे में जब यह दवा मरीज को दी जाएगी, तो वायरस इस दवा को ग्‍लूकोज समझकर लेगा और उसी में फंस जाएगा। इससे रिजल्ट यह मिलेगा कि वायरस अपनी नई कॉपीज बना नहीं बना पाएगा। यानि इसके कारण वायरस की ग्रोथ रूक जाएगी।

इस बारे में INMAS के डायरेक्‍टर डॉ. अनिल मिश्रा का कहना है कि 2डीजी दवाई अपनी कॉपी तैयार करने वाले वायरस को कैद कर लेती है। यानी वायरस का कोई भी वेरिएंट हो, अपनी भूख मिटाने के दवा को ग्लूकोज समझकर आगे बढ़ेगा, तो इसमें फंस कर रह जाएगा। डॉ. मिश्रा के अनुसार, इस दवा के लेने से ऑक्सीजन की डिमांड बढ़ जाएगी। क्योंकि वायरस तेजी से मल्‍टीप्‍लाई होने लगता है। जैसे ही यह प्रक्रिया रूकेगी, तो ऑक्सीजन की कमी भी दूर हो जाएगी।

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